Monday, June 14, 2010

अहमदी जवाब दीजिए

भोपाल गैस त्रासदी मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी ने 1996 में वह बहुचर्चित फैसला सुनाया जिसके तहत अभियोग की धाराएं बदलने से गैर इरादतन हत्या का मामला लापरवाही से हुई दुर्घटना में बदल गया और अनेक प्रश्न खड़े कर दिए।
१    आपके 1996 के जिस फैसले ने गैस त्रासदी मामले में अभियुक्तों की सजा कम करने का रास्ता साफ कर केस को कमजोर किया। उसके बारे में आपका क्या कहना है?
2    सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर आरोप तय करने से गुरेज करता है। फिर भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में आपने ऐसा किया। क्यो?
3    आप इससे सहमत हैं कि अगर आरोप ट्रायल कोर्ट में तय होते तो इस मामले में अभियुक्तों को सख्त सजा मिलने का रास्ता खुला रहता?
४    आरोपियों को दो-दो साल की सजा मिली। इसके लिए आप खुद को दोषी मानते हैं? 
5    आपका कहना है कि इस फैसले को लेकर कोई रिव्यू पिटीशन नहीं आई थी। दूसरी तरफ पीडि़तों का आरोप है कि ऐसा कहना सफेद झूठ है। आखिर सच क्या है?
6    आपके फैसले पर उठती उंगलियों के बीच क्या आप कोई समाधान भी सुझाएंगे? 
7    अगर दोबारा फैसला सुनाने का मौका आपको मिले तो क्या निर्णय बदलेगा? 
8    कार्बाइड की भारत स्थित जिस प्रॉपर्टी को पहले राजसात किया गया था बाद में कोर्ट के निर्णय पर उसे फ्री करते हुए उससे मिली राशि से भोपाल गैस अस्पताल बनाया गया। क्या यहां भी कार्बाइड फायदे में नहीं रहा?
9    जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में आपने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया उसी से जुड़े एक अस्पताल के ट्रस्ट के अध्यक्ष का दायित्व संभालना क्या नैतिक रूप से उचित था?
10    लाभ उठाने के आरोपों के चलते यह निर्णय लेते समय आप किसी द्वंद्व से नहीं गुजरे?

1 comment:

Neelambar Jha said...

i must congratulate mr kalpesh yagnik and the team for having the guts to put such questions to justice ahmadi!!!! frankly speaking, these questions are not put to Mr ahmadi but to Justice ahmadi that means to our esteemed supreme court and as the guarantor of our fundamental rights, it must satisfy - "We, the people of India......!!!!