2001 में तब के एटार्नी जनरल सोली सोराबजी ने अटल सरकार को राय दी थी कि एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिश न करें, क्योंकि यह सफल नहीं होगी। उन्होंने अमेरिकी कानूनी फर्म से राय की सलाह भी दी थी। 2003 में सरकार ने प्रत्यर्पण का आग्रह किया, जिसे ठुकरा दिया गया। जाहिर है काफी वक्त गुजरने से प्रत्यर्पण की कोशिश पर असर पड़ा। भास्कर सोराबजी से सवाल पूछ रहा है। उम्मीद है वे २४ घंटे के भीतर जवाब देंगे। ये सवाल हम उन्हें फैक्स और मेल के जरिये भेज रहे हैं।
1. जब 98 में एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिश करने की राय दी थी तो 2001 में इसे बदला क्यों?
2. अमेरिकी कानूनी फर्म से राय लेने को क्यों कहा जबकि सरकार ने आपसे सलाह मांगी थी?
3. गैस रिसाव से एंडरसन का सीधा रिश्ता जोडऩे वाले पुख्ता सबूतों को नजरअंदाज क्यों किया?
4. ऐसा क्यों नहीं कहा कि अमेरिकी फर्म की सलाह के बावजूद सरकार को प्रत्यर्पण की कोशिश करनी चाहिए?
5. एंडरसन के खिलाफ सबूत मौजूद होने के बाद भी यह क्यों कहा कि प्रत्यर्पण के लिए जरूरी सबूत मिलने की उम्मीद नहीं है?
6. आपने बाद में कहा कि सरकार सप्लीमेंटरी केस भेजकर अमेरिकी फर्म से गैस पीडि़तों के संतोष के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने की राय ले सकती थी। ऐसा राय देते समय क्यों नहीं कहा?
अहमदी से मांगिए जवाब
भास्कर ने अहमदी से १० सवाल पूछे थे। उनकी चुप्पी के बाद हम अहमदी के फोन नंबर व पते छाप रहे हैं। ताकि आप उन पर सच जानने के लिए दबाव बनाएं। फोन : 0129-2511291/९३। पता : सी-3 कांत एन्क्लेव, शूटिंग रेंज, पोस्ट- अनंतपुर, फरीदाबाद (हरियाणा)।
E-Mail: amahmadi@dataone.in

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