Monday, June 14, 2010

आइए, आप और हम लड़ें भोपाल के इंसाफ की लड़ाई...

कहीं पढ़ा था कि जब से ये हरे-भरे पेड़ कटकर 'कुर्सी' बने हैं, बगीचे के धर्म ही भूल गए हैं। इन्हें जलती लाशों के सुलगते धुएं में भी सुकून भरी महक आती है। भगत सिंह ने कहा था कि जो ऊंचा सुनते हैं, उन्हें धमाकों की जरूरत होती है। भोपाल को इंसाफ दिलाने के लिए पूरे देश की जनता को एक आवाज में निकृष्ट सरकार, भ्रष्ट नौकरशाहों और ढीली न्यायपालिका की खिलाफत करनी होगी। आइए, आप और हम लड़ें भोपाल के इंसाफ की लड़ाई।

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